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भुजंगासन

यानी पेट के बल लेट कर धीरे-धीरे हाथों के बल ऊपर को उठना और सिर को उठाना जैसे कोबरा बैठा हो। यह मुद्रा न सिर्फ आपको आराम दिलाती है बल्कि दिमाग से जुड़ी नसों को भी संतुलित और प्रेरित करती है।

 

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पश्चिमोत्तानासन

यह आसन विचलित मन को शांत करता है। इसके नियमित अभ्यास से न केवल तनाव दूर होता है, बल्कि रीढ़ भी ठीक रहती है। यह आसन करने के लिए पैर और हाथ सीधे आगे की तरफ फैलाकर खुद को सामने की ओर ऐसे झुकाएं कि माथा घुटनों को छुए। ऐसा करते हुए ध्यान रखें कि अपने सामर्थ्य से ज्यादा झुकने के लिए जबर्दस्ती न करें। कमर को झटका देकर आगे झुकाने की कोशिश बिलकुल न करें।

 

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ध्यान

ज्यादातर लोग जानते हैं कि ध्यान लगाने से तनाव दूर करने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान का फायदा इससे कहीं ज्यादा है। कई अध्ययनों में यह पता चला है कि नियमित
ध्यान लगाने से (हफ्ते में कम से कम 6 घंटे)
हमारे दिमाग की बनावट में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। इससे न सिर्फ याददाश्त तेज होती है, बल्कि एकाग्रता, सीखने, काम करने और फैसला लेने की क्षमता भी बढ़ती है।

 

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हलासन

यह आसन गर्दन, कंधों, पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसके अभ्यास से दिमाग में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे मानसिक तनाव और थकान से राहत मिलती है।

 

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सेतु बंधासन

यह आसन पीठ की मांसपेशियों की मजबूती के लिए उत्तम है। यह छाती, गर्दन और रीढ़ को राहत देते हुए तनाव, थकान दूर करके दिमाग को शांत करने में मदद करता है।

 

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भ्रामरी प्राणायाम

यह प्राणायाम दिमाग को लगभग तुरंत शांत करने में मदद करता है। यह तनाव, गुस्सा, थकान दूर करके एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने में सहायता करता है।

 

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हफ्ते में 150 मिनट चलें, साइकोसिस से होगा बचाव

यदि आपकी उम्र 18 से 64 साल के बीच है तो हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह सलाह देते हुए कहा है कि शारीरिक असक्रियता के कारण ‘साइकोसिस’ नाम का मानसिक रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। यह रोग हमारी जिंदगी के 15 साल तक कम कर सकता है। इतना ही नहीं, शारीरिक असक्रियता धूम्रपान जितनी ही खतरनाक है और ऐसी मौतों का चौथा सबसे बड़ा कारण है, जिन्हें टाला जा सकता है। करीब 50 देशों के लगभग 2 लाख लोगों पर शोध के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी है कि हफ्ते में 150 मिनट शरीर को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है, आप सैर कर सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार ऐसी कोई भी एक्सरसाइज अपना सकते हैं। किंग्स कॉलेज लंदन की ओर से किए गये इस शोध में यह भी पाया गया कि शारीरिक असक्रियता के कारण साइकोसिस का खतरा पुरुषों में ज्यादा होता है। साइकोसिस एक ऐसा मनोरोग है, जो हमारे विचारों, महसूस करने की क्षमता और भावनाओं को प्रभावित करता है। यह हमारे विवेक, व्यवहार और व्यक्तित्व पर भी असर डालता है। इसमें व्यक्ति अपनी ही बात को सही मानता है, किसी के आस-पास न होते हुए भी उसे आवाज और कुछ दिखने का भ्रम होता है। इस बीमारी में व्यवहार में भी परिवर्तन हो सकते हैं। कभी-कभी व्यवहार उत्तेजना का रूप ले सकता है और कभी-कभी व्यक्ति कटा-कटा सा रहने लगता है।

 

दौड़-भाग तो जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। कामकाज का दबाव भी दिमाग को सहना पड़ता है। नतीजा होता है तनाव, जो हमारे व्यवहार ही नहीं, दिमागी क्षमता को भी प्रभावित करने लगता है। इस तनाव को दूर करने और दिमाग को तरोताजा करने में मदद कर सकता है योग।

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6 चम्मच से ज्यादा चीनी बच्चों के दिल के लिए खतरा

चीनी बच्चों के दिल की सेहत पर भारी पड़ सकती है। ज्यादा चीनी से बढ़ सकता है मोटापा और ब्लड प्रेशर और यह दोनों ही दिल के रोगों को बुलावा देते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक शोध के आधार पर सलाह दी है कि 2 से 18 साल तक के बच्चों व युवाओं को दिन में 6 छोटे चम्मच या 25 ग्राम से ज्यादा चीनी (एडेड शुगर) बिलकुल नहीं लेनी चाहिये। ध्यान रखें कि यह एडेड शुगर टॉफी, चॉकलेट से लेकर कोल्ड ड्रिंक,  जूस जैसी तमाम चीजों में होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक खाने-पीने की ऐसी सभी चीजें मिलाकर दिनभर में चीनी की मात्रा 6 चम्मच से ज्यादा कतई नहीं होनी चाहिये। इतनी चीनी से हमें करीब 100 कैलरी मिलती हैं। वहीं, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को तो एडेड शुगर बिलकुल न देने की सलाह दी गयी है। अमेरिका के एमरी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं का कहना है कि इसी उम्र में स्वाद को लेकर हमारी प्राथमिकताएं बनती हैं। इस उम्र में बच्चों को कम मीठा देंगे, तो यह आदत आगे चलकर भी बनी रहेगी।

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6 चम्मच से ज्यादा चीनी बच्चों के दिल के लिए खतरा

चीनी बच्चों के दिल की सेहत पर भारी पड़ सकती है। ज्यादा चीनी से बढ़ सकता है मोटापा और ब्लड प्रेशर और यह दोनों ही दिल के रोगों को बुलावा देते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक शोध के आधार पर सलाह दी है कि 2 से 18 साल तक के बच्चों व युवाओं को दिन में 6 छोटे चम्मच या 25 ग्राम से ज्यादा चीनी (एडेड शुगर) बिलकुल नहीं लेनी चाहिये। ध्यान रखें कि यह एडेड शुगर टॉफी, चॉकलेट से लेकर कोल्ड ड्रिंक,  जूस जैसी तमाम चीजों में होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक खाने-पीने की ऐसी सभी चीजें मिलाकर दिनभर में चीनी की मात्रा 6 चम्मच से ज्यादा कतई नहीं होनी चाहिये। इतनी चीनी से हमें करीब 100 कैलरी मिलती हैं। वहीं, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को तो एडेड शुगर बिलकुल न देने की सलाह दी गयी है। अमेरिका के एमरी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं का कहना है कि इसी उम्र में स्वाद को लेकर हमारी प्राथमिकताएं बनती हैं। इस उम्र में बच्चों को कम मीठा देंगे, तो यह आदत आगे चलकर भी बनी रहेगी।

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